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एक माँ की बगावत

 "इसे लाइव कर दें क्या!" रोहन ने ट्राइपॉड पर लगे फोन के कैमरे को सेट करते हुए अपनी पत्नी नीती के कान में फुसफुसाकर कहा। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जो प्यार या अपनेपन की नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले चंद 'लाइक्स', 'व्यूज' और पैसों की भूख थी।

नीती ने असहज होते हुए कहा, "नहीं, सिर्फ वीडियो बना लो। 'वायरल ड्रामा' वाले पेज ने अबकी बार पचास हज़ार देने का वादा किया है अगर उन्हें हमारा यह वीडियो पसंद आ गया तो... तुमने ही तो बताया था।" उसने अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए एक बनावटी कड़कपन चेहरे पर लाने की कोशिश की।

रोहन ने अपने होंठों पर एक धूर्त मुस्कान लाते हुए नई जानकारी जोड़ी, "लेकिन नीती, उस पीआर एजेंसी वाले ने मुझे एक और बात कही है। उन्होंने कहा है कि अगर हम कोई ऐसा वीडियो बनाएँ जिसमें तुम अम्मा को सच में धक्का देकर घर से निकाल रही हो, या फिर अपने चार साल के आरव को किसी अंधेरे कमरे में बंद करके डराने वाला भयानक 'प्रैंक' करें और उसके असली आंसुओं का वीडियो भेजें, तो वो सीधे एक लाख रुपये देंगे। आजकल सोशल मीडिया पर लोगों को ऐसे ही 'शॉकिंग' और 'इमोशनल' वीडियो पसंद आते हैं। सबसे ज़्यादा इसी तरह के पारिवारिक क्लेश और डरावने प्रैंक को सर्च किया जाता है।" रोहन बड़ी शेखी बघार रहा था, जैसे उसने कोई बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली हो।

नीती के कदम अचानक ठिठक गए। उसने अविश्वास और सदमे से रोहन की तरफ देखा। "नहीं!!! मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं करना। तुम्हारे प्यार और हमारे बेहतर भविष्य की बातों में आकर मैं अब तक एक बुरी बहू का मुखौटा लगाकर यह घटिया काम करती आई हूँ।" नीती ने रोहन को पीछे की तरफ धक्का मारते हुए अपना गुस्सा ज़ाहिर किया।

"अरे सोच ले," रोहन ने उसे फिर से लालच के जाल में फंसाने की कोशिश की, "तुझे वो डायमंड का नेकलेस चाहिए या नहीं? अगले महीने हमारी सालगिरह पर ले दूँगा। बस एक वीडियो की ही तो बात है। बच्चा थोड़ा रोएगा, चुप हो जाएगा और अम्मा को हम बाद में मना लेंगे।"

नीती वहीं सोफे पर धम्म से बैठ गई। उसके दिमाग में पिछले एक साल का पूरा घटनाक्रम किसी फिल्म की तरह घूमने लगा। रोहन एक साधारण नौकरी करता था, लेकिन जबसे उसे रील और वीडियो बनाने का चस्का लगा था, घर का पूरा माहौल ही बदल गया था। शुरुआत में सब कुछ मज़ाक जैसा था। वे पति-पत्नी के हल्के-फुल्के कॉमेडी वीडियो बनाते थे। लेकिन फिर रोहन की लालसा बढ़ने लगी। उसे समझ आ गया था कि 'नेगेटिविटी' और 'पारिवारिक झगड़ों' के वीडियो ज़्यादा चलते हैं। उसने नीती को मजबूर किया कि वह कैमरे के सामने अपनी सीधी-सादी बूढ़ी सास पर चिल्लाने का नाटक करे।

अम्मा, जो इस इंटरनेट की छद्म दुनिया को बिल्कुल नहीं समझती थीं, सच में डर जाती थीं। जब नीती कैमरे के सामने उन पर झल्लाती, तो अम्मा की आँखें भर आती थीं। उनके हाथ कांपने लगते थे। वीडियो कट होने के बाद नीती अम्मा के पैर पकड़कर बंद कमरे में घंटों रोती, उनसे माफ़ी मांगती कि यह सब सिर्फ एक नाटक है, एक छोटे से रोल की तरह है जिससे उन्हें पैसे मिलेंगे। अम्मा तो अपनी बहू को बेटी मानकर उसे माफ़ कर देती थीं, लेकिन नीती की आत्मा रोज़ तिल-तिल कर मरती थी।

रोहन ने नीती के प्यार और उसके समर्पण का हमेशा फायदा उठाया था। वह अक्सर कहता था, "नीती, बस कुछ दिन और। फिर हम अपना बड़ा घर ले लेंगे। अम्मा को भी सारे तीर्थ करवाएंगे। बस थोड़े और सब्सक्राइबर्स बढ़ जाएं।" प्यार में अंधी और एक सुरक्षित भविष्य की आस में नीती अपनी मर्यादा की रेखाओं को पार करती चली गई।

लेकिन आज? आज रोहन ने जो मांगा था, उसने नीती की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया था। एक लाख रुपये के लिए अपनी बूढ़ी सास को सच में जलील करना और उन्हें शारीरिक रूप से चोट पहुंचाना? अपने जिगर के टुकड़े, चार साल के आरव, जो अंधेरे से वैसे ही खौफ खाता था, उसे एक कमरे में बंद करके उसके डर और चीखों का तमाशा दुनिया को दिखाना? यह तो कोई कला या मजबूरी नहीं थी, यह एक भयानक मानसिक बीमारी थी जो रोहन के दिमाग में घर कर गई थी।

उसने उस ट्राइपॉड की तरफ देखा जो अब उसे अपने घर की खुशियों को निगलने वाला कोई लोहे का राक्षस लग रहा था। दूसरी तरफ कमरे में बेफिक्र सो रहे आरव का मासूम चेहरा और बाहर दालान में तुलसी को जल चढ़ाती अम्मा की कांपती उंगलियां उसकी आँखों के सामने तैर गईं।

कुछ देर गहरी सोच में डूबे रहने के बाद, नीती उठी। उसने अपने चेहरे पर चढ़ा हुआ वह तीखा, बनावटी मेकअप टिश्यू पेपर से रगड़ कर पोंछ डाला। उसने ट्राइपॉड से फोन निकाला और उसमें मौजूद सारे स्क्रिप्टेड वीडियो एक झटके में डिलीट कर दिए।

"सुन रोहन," नीती की आवाज़ में अब न तो कोई डर था और न ही किसी आज्ञाकारी पत्नी की बेबसी। उसकी आँखों में एक ऐसी आग थी जो किसी भी कीमत पर बुझने वाली नहीं थी। "इश्क में तेरे साथ अब तक सब जायज़ लग रहा था। मुझे लगा मैं अपने परिवार के भविष्य के लिए दुनिया की नज़रों में थोड़ा बुरा बन रही हूँ, तो कोई बात नहीं। लेकिन सिर्फ चंद रुपयों और एक गहने के लिए अपने ही मासूम बच्चे के आंसुओं की नुमाइश करना या अम्मा के आत्मसम्मान को सरेआम नीलाम करना मुझे हरगिज़ मंज़ूर नहीं।"

रोहन कुछ बोलने ही वाला था कि नीती ने हाथ उठाकर उसे सख्ती से चुप करा दिया। "एक माँ हूँ और इस घर की ढाल भी... प्यार में तेरी हर बात मानकर अपने उसूलों की कुर्बान हो सकती थी, तो आज अपने बच्चे और परिवार की इज़्ज़त बचाने के लिए तेरी इस झूठी दुनिया की कुर्बानी ले भी सकती हूँ। अगर आज के बाद तूने इस घर की शांति और मर्यादा को अपने कैमरे में भुनाने की कोशिश की, तो मैं खुद पुलिस को बुलाकर तेरा वो हाल करूँगी जो तू जिंदगी भर याद रखेगा। समझा ना..."

कमरे में सन्नाटा छा गया। रोहन के हाथ से फोन छूटकर बिस्तर पर गिर पड़ा। उसे एहसास हो गया था कि उसने न सिर्फ अपनी इंसानियत की हद पार की थी, बल्कि अपनी उस पत्नी का भरोसा भी हमेशा के लिए खो दिया था जिसने प्यार में अपनी अच्छाई तक दांव पर लगा दी थी। नीती ने मुड़कर बाहर का दरवाज़ा खोला और अम्मा के पास जाकर उनके गले लग गई। आज उसे महसूस हो रहा था कि असली सुकून किसी 'वायरल वीडियो' या बैंक बैलेंस में नहीं, बल्कि अपनों के प्यार, सम्मान और उनकी सुरक्षित मुस्कान में है।

क्या आपको भी लगता है कि सोशल मीडिया की इस अंधी दौड़ और व्यूज की भूख ने हमारे घरों की शांति और रिश्तों की मर्यादा को खत्म कर दिया है? क्या प्यार के नाम पर पार्टनर का इस तरह शोषण करना सही है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएं।

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