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शगुन (मामेरा) हमारी हैसियत अनुसार करना…

 "लाओ बहू ! सब्जी हमें दे दो हम काट देंगे ।"रोज की तरह मालती देवी टीवी पर भागवत कथा देख रही थी और उनकी बहू माया रसोई में खाना बना रही थी ।

तभी मालती देवी की बेटी वैशाली का फोन आता है "अरे अम्मा एक खुशखबरी देनी है "वैशाली उत्साहित होकर बोली ।

तेरी खनकती आवाज से ही समझ सकती हूं कि खुशखबरी क्या है । हमारी लाडो कोमल का रिश्ता तय हो गया क्या ?। मालती देवी बोली ।

हां मां, कोमल का रिश्ता तय हो गया । हम जिस रिश्ते की बात तुमसे करते थे ना , वही रिश्ता ।लड़के वाले बहुत ही खानदानी और रईस है। अच्छी जगह रिश्ता तय हो गया है। लड़के वाले कल ही सगाई करने का बोल रहे हैं । आप सब भी आ जाते तो अच्छा रहता ।"वैशाली अपनी मां से बोली ।

नहीं बेटा हम नहीं आ पाएंगे इतना दूर का सफर है ।

यूं अचानक ,इतनी जल्दी सब व्यवस्था नहीं हो पाएगी। कोमल को हमारा आशीर्वाद देना ।^मालती जी बोली

"अम्मा भैया से कहना शगुन (मामेरा )की तैयारी अभी से शुरू कर दे ।कोई चीज की कमी ना रहने पाए।पिछले साल हमारे नए घर के गृह प्रवेश की पूजा पर कितना कम शगुन किया था ।"

मेरी सास  ,जेठानी के सामने मेरी तो नाक ही कट गई थी। शादी में अभी तीन -चार महीने का वक्त है ।इस बार ऐसा ना होने पाए। इस बात का विशेष ध्यान रखना।" वैशाली ने अपनी मां से कठोरता से कहा।

मालती देवी इस घर की बुजुर्ग ।पति तो अब रहे नहीं। उनकी दो विवाहित बेटियां ।एक वैशाली और दूसरी अलका ।

आज वैशाली की बेटी कोमल का रिश्ता तय हुआ। वैशाली एक बड़े घर की बहू है।

मालती देवी का एक बेटा मनीष है ।जो सरकारी दफ्तर मे छोटी सी नौकरी करता है ।मनीष की दो बेटियां हैं। उनमें से एक की शादी अभी 6 महीने पहले ही की थी।

शाम को मनीष घर आता है।

"अम्मा वह जीजा जी का फोन आया था ।कोमल का रिश्ता तय हो गया है ।'मनीष ने जानकारी दी।

"हां बेटा वैशाली भी कह रही थी कि भैया से कहना शगुन उनकी हैसियत अनुसार करें ।इस बार उसकी बेइज्जती ना होने पाए ।"मालती जी ने कहा।

मनीष चिंता से अपने कमरे में चले जाता है ।उसकी पत्नी माया पानी लेकर आती है।

"माया इतनी जल्दी सब कैसे होगा ।"

उसके दिमाग में खर्चों की लिस्ट बनने लगी ।

"अभी 6 महीने पहले ही तो कर्ज लेकर बड़ी बेटी की शादी की है ।अभी तक कर्ज चुका रहा हूं ।छोटी बेटी भी साल -देढ साल में शादी के लिए तैयार हो जाएगी।"

4 लोगों के आने-जाने का खर्च, महंगे कपड़े ,वैशाली की ससुराल अनुसार शगुन( मामेरा )।मैं नहीं कर पाऊंगा।पर बहन की इज्जत का सवाल है मैं क्या करूं, कुछ समझ नहीं आ रहा।"

मनीष ने अपना दुख दर्द अपने पत्नी माया से साझा किया।

"आप चिंता ना करें  ।हमारी हैसियत अनुसार जितना बन पड़ेगा ।हम जरूर करेंगे ।आप हाथ मुंह धो ले

।में चाय नाश्ता लाती हू।" माया  ने कहा।

मालती देवी ने अपने बेटा बहू की सारी बातें सुन ली।

मनीष पूरी रात चिंता में सो   ना सका।

:  सुबह माया -माया "मनीष चिल्लाया

क्या हुआ आपको ?माया ने देखा तो मनीष पूरा पसीना पसीना हो चुका था।

मुझे सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ हो रही है।

मनीष ने धीरे से कहा

"जा पूजा सामने वाले भैया को जल्दी से बुला ला ।"माया ने अपनी छोटी बेटी पूजा से कहा।

पड़ोसियों की मदद से मनीष को तुरंत अस्पताल ले जाया गया ।डॉक्टर ने मेजर हार्ट अटैक बताया।

मालती देवी से आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझते अपने बेटे की हालत देखी नहीं जा रही थी।

"भगवान मेरी भी उम्र मेरे बेटे को लग जाए"। बार-बार भगवान से मिन्नत कर रही थी ।

माया का तो रो रो कर बुरा हाल हो चुका था ।

सर्जरी की जाती है ।24 घंटे बाद डॉक्टर कहते हैं कि खतरा टल गया है ।बस आप सब उन्हें तनाव से दूर रखें और आराम करने दें ।

"अम्मा भैया अब कैसे हैं ?मुझे पूजा ने फोन कर बताया था ।वैशाली ने अपनी मां मालती देवी से फोन कर पूछा।

"पहले से बेहतर है। पर डॉक्टर ने उसे तनाव से दूर रहने की सलाह दी है ।

देख बेटा तुम तो जानती हो तुम्हारे भैया की साधारण नौकरी है ।अभी तो तुम्हारी बड़ी बेटी की शादी है ।फिर साल भर के अंदर बेटे की भी होगी ।तुम्हारी बहन के भी दो बच्चे हैं सबको एक जैसा शगुन करना पड़ेगा ।किसी को कम तो किसी को ज्यादा  ऐसा तो नहीं कर सकते ?

मनीष की भी एक बेटी अभी ब्याहनी बाकी है। तो क्या तुम्हारा भाई कर्ज ले लेकर पूरी जिंदगी ऐसे ही शगुन (मामेरा )करता रहेगा ।

मैं अपने बेटे को अब तनाव में नहीं देख सकती ।

इसलिए मैंने फैसला किया है कि हम लोग शादी में नहीं आएंगे। बस  पैसे भेज देंगे ।इससे तुमको जो सही लगे बच्ची के लिए ले लेना ।क्योंकि सबके

आने जाने , महंगे कपड़ों ,का खर्च भी बहुत हो जाएगा।

"तुम दोनों बहने हर साल मायके आती हो

तुम्हारे भाई भाभी ने हमेशा तुम्हारा उचित सत्कार किया है ।तुम्हारे मनपसंद पकवान बनाए ।भैया बाहर घूमने ले जाता ।यह सब प्यार है ।लेकिन समाज को दिखाने के लिए मायके वाले बजट से ज्यादा शगुन मजबूर होकर करें तो यह गलत है।" मालती देवी ने साफ शब्दों में अपनी बेटी को कह दिया।

"अम्मा मुझे माफ कर दो ।मेरे लिए शादी में आप सब की उपस्थिति जरूरी है। मेरी बेटी को मामा ,मामी  नानी का आशीर्वाद ही काफी है ।आपने सही कहा दिखावे के लिए यह रस्म यूं ही चलती रहे तो यह प्रथा मायके वालों के लिए बोझ बन जाएगी। " वैशाली ने समझदारी से कहा

तीन चार महीने बाद वैशाली की बेटी की शादी में उसके मायके वाले पहुंचते हैं ।वैशाली खुश थी ।उसके मायके वाले आए हैं ।

जेठानी ने पूछा "वैशाली बताओ तुम्हारे मायके से शगुन में क्या आया।"

मेरे मायके वाले आज मेरे साथ हैं, यह क्या कम है? मेरी बेटी को नानी ,मामा -मामी का आशीर्वाद मिलेगा और क्या चाहिए । वैशाली ने कहा।

जो भी भाई भाभी लाएं उसे उसने अनमोल समझ स्वीकार  किया।

- Sarika Rajkotia


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